उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के लैमगड़ा ब्लॉक के डोल गाँव में स्थित डोल आश्रम, जिसे श्री कल्याणिका…
उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के लैमगड़ा ब्लॉक के डोल गाँव में स्थित डोल आश्रम, जिसे श्री कल्याणिका हिमालयन देवस्थानम् भी कहा जाता है, हिमालय की गोद में बसा एक अद्वितीय आध्यात्मिक केंद्र है, जिसकी स्थापना तपस्वी संत परमहंस बाबा कल्याणदास जी महाराज ने की थी। बाबा कल्याणदास जी ने मात्र बारह वर्ष की आयु में घर त्याग कर अपने गुरु परमहंस बाबा स्वरूपदास जी से दीक्षा ली और जीवन का अधिकांश भाग हिमालय की गुफाओं तथा उड़ीसा के जंगलों में कठोर साधना में व्यतीत किया। वेद, योग और ध्यान के गहरे अध्ययन और साधना के बाद उन्होंने सन 1978 में अमरकंटक (मध्यप्रदेश) में “श्री कल्याण सेवा आश्रम” की स्थापना की और फिर 1990 के दशक में अल्मोड़ा की पहाड़ियों में “डोल आश्रम” की नींव रखी, जिसे आज संपूर्ण भारत और विदेशों तक ख्याति प्राप्त है। इस आश्रम का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म की शिक्षा, योग और ध्यान का प्रसार, वेदों व उपनिषदों का अध्ययन तथा समाज सेवा है। आश्रम परिसर में भव्य शिव मंदिर, ध्यान कक्ष, विशाल पुस्तकालय, संस्कृत गुरुकुल, गौशाला और साधकों के लिए निवास की व्यवस्था है। 2018 में यहाँ एक भव्य आयोजन के दौरान विश्व का सबसे बड़ा अष्टधातु निर्मित श्री यंत्र स्थापित किया गया, जिसे “श्रीपीठम्” या “श्रीयंत्र ध्यान पीठम्” कहा जाता है और यह साधना व ध्यान का केंद्र है। आश्रम के चारों ओर फैले देवदार और बांज के घने जंगल तथा हिमालयी चोटियों के अद्भुत दृश्य साधना के लिए अलौकिक वातावरण प्रदान करते हैं। यहाँ प्रतिदिन पूजा-अर्चना, वेदपाठ, ध्यान और सत्संग होता है, जबकि महाशिवरात्रि और गुरुपूर्णिमा जैसे पर्व विशेष उत्साह से मनाए जाते हैं। आश्रम में चल रही वेद पाठशाला में विद्यार्थियों को संस्कृत और शास्त्रों की नि:शुल्