कसार देवी मंदिर उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले में स्थित है और इसका निर्माण 2वीं शताब्दी (ईसा पूर्व/…
कसार देवी मंदिर उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले में स्थित है और इसका निर्माण 2वीं शताब्दी (ईसा पूर्व/गुप्तकाल) के समय का माना जाता है। यह मंदिर देवी दुर्गा के “कसार देवी” रूप को समर्पित है। यहाँ की खासियत यह है कि मंदिर एक पहाड़ी की चोटी पर बसा है, जहाँ से हिमालय की ऊँची चोटियाँ और अल्मोड़ा घाटी का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है।
कसार देवी मंदिर की आध्यात्मिक महत्ता इतनी गहरी है कि इसे “हिप्पी हिल” और “हिप्पी ट्रेल” का हिस्सा माना गया। 1960–70 के दशक में यहाँ कई विदेशी साधक और योगी ध्यान के लिए आए, जिनमें प्रसिद्ध हिप्पी संस्कृति के लोग भी शामिल थे। स्वामी विवेकानंद ने 1890 के दशक में इस स्थान पर ध्यान लगाया था और उन्होंने यहाँ की ऊर्जा को बहुत खास बताया। वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह स्थान महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वैन एलन बेल्ट (Van Allen Belt) के अंतर्गत आता है, जहाँ पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र अत्यधिक प्रभावशाली होता है। माना जाता है कि इसी कारण यहाँ ध्यान और साधना करने से गहरी आध्यात्मिक अनुभूति होती है।
कसार देवी मंदिर का परिसर दो भागों में बंटा है – एक मुख्य कसार देवी मंदिर और दूसरा भगवान शिव व अन्य देवी-देवताओं के छोटे मंदिर। यहाँ हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर “कसार देवी मेला” आयोजित होता है, जिसमें स्थानीय लोग और पर्यटक बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।
👉 संक्षेप में, कसार देवी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा, ऐतिहासिक महत्ता और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर जगह है, जिसने भारतीय संतों से लेकर विदेशी साधकों तक सभी को आकर्षित किया है।